उस बदमाशी लड़की की कहानी, कुछ साल बाद वह सात साल की हो गई
वह धीरे-धीरे स्कूल जाने लगी, उसकी माँ ने उसे स्कूल जाने से पहले रोक दिया, तुम घर का काम पूरा करे के स्कूल जाना फिर स्कूल जाने में देर हो जाती थी उसकी मां उससे नाश्ते में सिंग ओर चने खाने के लिए देती थी स्कूल ले जाने के लिए निकलती थी लेकिन वह एक विकलांग थी लिए इसलिए उसको स्कूल जाने में देर हो जाती थी फिर भी उसकी टीचरों को डांटती थी
टीचर बहुत डांटती थी कि क्यों तुम रोज-रोज देर से आती हो
बदमाशी लड़की को सुहाग 5:30 बजे जागना पड़ता है फिर उसको करियाने की दुकान पर उसको बिठाया गए वह बदमाशी लड़की लेकिन उसके नसीब में क्या लिखा था कि वह पता ही नहीं था कि वह कितनी बदमाशी थी क्यों कि उसके नसीब में घर का काम करना लिखा था
मेरी माँ ने वास्तव में मुझे दुकान का कुछ भाग खाने की अनुमति नहीं दी। अगर तुम रोओगी तो भी मे तुम को कुछ खाने नहीं दूंगी मुझे बाहर खेलने नहीं जाने देती थी सारी लड़की की तरह मुझे खेलने का बहुत शौक था लेकिन मेरी मां मुझे खेलने नहीं जाने देती थी
अच्छे कपड़े भी नहीं लेकर देती थी मुझे पुराने कपड़े जो गुजरी में मिलते थे वह पहनती थी और मुझे बहुत मार मारती थी मेरे मन के पास पैसे बहुत थे लेकिन वह कुछ खिलाती पिलाती भी नही थी और अच्छे कपड़े भी नहीं दिलाती थी बहुत कंजूस थी
जब भी मैं चुपके से खेलने बाहर निकलती थी तो मुझे घर में बुलाकर बहुत मार लगती मुझे 3 दिन तक खाना नहीं खाने देती थी मुझे भुखा सोना पड़ता मेरी हालत बहुत बुरी हो जाती थी लेकिन मेरी मां मुझे कुछ मेरे में ध्यान नहीं देती और मुझे खाने बहुत भूख लगती है लेकिन वह मुझे खाना खाने नहीं देती भगवान भगवान ऐसी मां किसी को ना दे ।
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गरीब बेटी की कहानी